उत्तराखंड।।पत्रकार हितों को लेकर Voice of Media ने मुख्यमंत्री को सौंपा 15 सूत्रीय मांग-पत्र।

पत्रकार सुरक्षा कानून से लेकर स्वास्थ्य बीमा, पेंशन, आवास और कल्याणकारी योजनाओं में गैर-मान्यताप्राप्त पत्रकारों को शामिल करने की उठाई मांग

देहरादून।।उत्तराखंड में पत्रकारों एवं मीडिया संस्थानों के हितों के संरक्षण तथा पत्रकार कल्याण को लेकर Voice of Media, Northern Zone ने मुख्यमंत्री को 15 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा है।

संगठन के नॉर्थ जोन अध्यक्ष दिनेश पाल सिंह गुसाईं की ओर से प्रस्तुत मांग-पत्र में पत्रकार सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, पेंशन, आवास, सरकारी विज्ञापन नीति सहित पत्रकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है।

संगठन ने कहा कि उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से संवेदनशील राज्य में पत्रकार शासन-प्रशासन और आम जनता के बीच महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाते हैं।

पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में पत्रकार सीमित संसाधनों के बावजूद जोखिम उठाकर जनसमस्याओं और जनहित के मुद्दों को सामने लाते हैं।इसके बावजूद ग्रामीण, स्वतंत्र, डिजिटल, लघु एवं गैर-मान्यताप्राप्त पत्रकारों के सामने आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी अनेक चुनौतियां हैं।

पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग

मांग-पत्र में राज्य में प्रभावी Journalist Protection Framework/Journalist Protection Act लागू करने की मांग की गई है।

संगठन का कहना है कि पत्रकारों के साथ हिंसा, धमकी, उत्पीड़न या दबाव की घटनाओं पर त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के लिए स्पष्ट व्यवस्था आवश्यक है।

गैर-मान्यताप्राप्त पत्रकारों को भी मिले योजनाओं का लाभ

Voice of Media ने गैर-मान्यताप्राप्त पत्रकारों को भी पत्रकार कल्याण योजनाओं के दायरे में शामिल करने की मांग की है।

संगठन ने कहा कि वास्तविक पत्रकारिता कार्य के सत्यापन के आधार पर स्वतंत्र, ग्रामीण और डिजिटल पत्रकारों को भी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।साथ ही राज्य पत्रकार कल्याण कोष के विस्तार का प्रस्ताव रखा गया है।

पेंशन, स्वास्थ्य और जीवन बीमा की मांग

वरिष्ठ पत्रकारों के लिए सरल एवं व्यापक पत्रकार पेंशन योजना लागू करने तथा लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे ग्रामीण एवं स्वतंत्र पत्रकारों को भी इसका लाभ देने की मांग की गई है।

इसके अलावा पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा एवं जीवन बीमा की व्यवस्था करने तथा दून अस्पताल और एम्स में पत्रकारों के लिए विशेष टिकट काउंटर बनाए जाने का सुझाव दिया गया है।

छोटे और डिजिटल मीडिया संस्थानों के लिए पारदर्शी विज्ञापन नीति

मांग-पत्र में लघु, ग्रामीण, डिजिटल एवं स्वतंत्र मीडिया संस्थानों के लिए पारदर्शी सरकारी विज्ञापन नीति लागू करने की मांग की गई है। विज्ञापन वितरण में स्पष्ट पात्रता और दर व्यवस्था के साथ प्रसार, पहुंच, जनसरोकार तथा पत्रकारिता की गुणवत्ता को भी आधार बनाए जाने की बात कही गई है।

जिला और ब्लॉक स्तर पर मीडिया सेंटर की मांग

संगठन ने प्रत्येक जिला मुख्यालय एवं प्रमुख विकासखंडों में मीडिया सेंटर/प्रेस सुविधा केंद्र स्थापित करने की मांग की है।लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे पत्रकारों के लिए आवासीय योजनाओं में पृथक कोटा अथवा रियायती आवास की व्यवस्था तथा आर्थिक रूप से कमजोर पत्रकारों के बच्चों की उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति योजना शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

डिजिटल पत्रकारिता और प्रशिक्षण पर जोर

बदलते मीडिया परिदृश्य को देखते हुए डिजिटल न्यूज पोर्टल, वेब मीडिया, मोबाइल पत्रकारिता और स्वतंत्र पत्रकारों के लिए पारदर्शी मान्यता एवं पंजीकरण व्यवस्था विकसित करने की मांग की गई है।

पत्रकारों के क्षमता निर्माण के लिए डिजिटल पत्रकारिता, साइबर सुरक्षा, खोजी पत्रकारिता, आपदा रिपोर्टिंग, तथ्य-जांच और मीडिया कानून जैसे विषयों पर नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव भी दिया गया है।

आपदा रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए विशेष सुरक्षा

उत्तराखंड की भौगोलिक एवं आपदा संवेदनशीलता को देखते हुए बाढ़, भूस्खलन, वनाग्नि, भूकंप सहित अन्य आपदाओं की कवरेज करने वाले पत्रकारों के लिए विशेष सुरक्षा प्रशिक्षण, आवश्यक उपकरण और बीमा कवर उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

राज्य स्तरीय पत्रकार कल्याण परिषद बनाने का प्रस्ताव

Voice of Media ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में State Journalists Welfare Council गठित करने का प्रस्ताव भी रखा है।

संगठन ने परिषद में मान्यता प्राप्त पत्रकारों के साथ-साथ गैर-मान्यताप्राप्त, ग्रामीण, डिजिटल एवं स्वतंत्र पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों को भी उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग की है।

उच्चस्तरीय समिति गठित कर समयबद्ध कार्रवाई का अनुरोध

Voice of Media के नॉर्थ जोन अध्यक्ष दिनेश पाल सिंह गुसाईं ने मुख्यमंत्री से 15 सूत्रीय मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए उच्चस्तरीय समिति गठित करने, समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने और पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित संवाद स्थापित करने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि पत्रकारों को सुरक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराना किसी व्यक्ति या संगठन को लाभ पहुंचाना नहीं है,बल्कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता को मजबूत करने की दिशा में निवेश है।

Voice of Media ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार पत्रकारों की समस्याओं एवं मांगों पर सकारात्मक और संवेदनशील निर्णय लेते हुए उत्तराखंड में पत्रकार कल्याण के लिए ठोस पहल करेगी।

प्रगति मीडिया उत्तराखंड से संपादक की रिपोर्ट।

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