उत्तराखंड।।“अपनी गणना अपने गाँव” अभियान की हुई शुरुआत।-जोत सिंह बिष्ट

टिहरी गढ़वाल।।उत्तराखंड के गाँवों को बचाने और लगातार बढ़ रहे पलायन पर रोक लगाने के उद्देश्य से “अपनी गणना अपने गाँव” अभियान की शुरुआत की जा रही है।

इस अभियान को लेकर मेरे गाँव के संयोजक जोत सिंह बिष्ट ने टिहरी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों से लगातार हो रहे पलायन के कारण गाँवों की जनसंख्या तेजी से घट रही है, जिससे भविष्य में गाँवों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है। ऐसे में यह अभियान लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने और जनगणना के दौरान अपने मूल गाँव में ही पंजीकरण कराने के लिए प्रेरित करेगा।

जनगणना 2027 को लेकर रणनीति

जोत सिंह बिष्ट ने बताया कि आगामी जनगणना प्रक्रिया के तहत पहले 25 मई तक मकान गणना का कार्य पूरा किया जाएगा, जिसके बाद फरवरी 2027 में मुख्य जनगणना होगी। इसी दौरान यह अभियान विशेष रूप से उन लोगों तक पहुंचेगा जो रोजगार या अन्य कारणों से शहरों में रह रहे हैं।

गाँवों के अस्तित्व पर संकट

उन्होंने चिंता जताई कि अगर जनसंख्या में गिरावट जारी रही तो:

करीब 1000 ग्राम पंचायतों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है

पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के पदों में कटौती हो सकती है

जनसंख्या आधारित सरकारी बजट और योजनाओं में भारी कमी आ सकती है

उन्होंने यह भी कहा कि एक विधानसभा क्षेत्र खत्म होने पर करीब 200 करोड़ रुपये सालाना बजट का नुकसान होता है, जिससे क्षेत्रीय विकास पर सीधा असर पड़ता है।

जनजागरण का बड़ा अभियान

इस अभियान के तहत जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कथावाचकों, लोक गायकों, प्रवासी संगठनों और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों से सहयोग लेने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक यह संदेश पहुंच सके।

भावनात्मक अपील

जोत सिंह बिष्ट ने प्रवासी उत्तराखंडियों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि कोविड-19 संकट के समय जिन लोगों ने अपने गाँवों में सुरक्षित महसूस किया, अब वही गाँव अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए उन्हें पुकार रहे हैं।

अंतिम संदेश

उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे अपने परिवार सहित अपने गाँव में जाकर जनगणना कराएं और अपनी जन्मभूमि के प्रति जिम्मेदारी निभाएं।

📌 पत्रकारीय नजरिया:

यह अभियान केवल जनगणना तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के गाँवों के अस्तित्व, विकास और भविष्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सामाजिक आंदोलन बन सकता है। अगर इसे व्यापक जनसमर्थन मिला, तो यह पलायन की समस्या पर नियंत्रण में एक मजबूत कदम साबित हो सकता है।

प्रगति मीडिया उत्तराखंड टिहरी गढ़वाल से संपादक की रिपोर्ट।

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