वॉइस ऑफ मीडिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा ज्ञापन, पत्रकारों के रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा उठाया।
उत्तराखंड।। देश में पत्रकारिता एवं टेलीविजन उद्योग के सामने बढ़ती टीआरपी प्रतिस्पर्धा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन, कॉस्ट कटिंग और रोजगार संकट को लेकर वॉइस ऑफ मीडिया (VOM) इंटरनेशनल फोरम ने केंद्र सरकार से व्यापक कदम उठाने की मांग की है।
संगठन के संस्थापक एवं अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप काले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर टीआरपी व्यवस्था को स्थायी रूप से बंद करने तथा मीडिया क्षेत्र के लिए व्यापक राष्ट्रीय नीति बनाने की अपील की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि टीआरपी की प्रतिस्पर्धा के कारण पत्रकारों, संपादकों, रिपोर्टरों, डेस्क कर्मचारियों, कैमरामैन और तकनीकी कर्मचारियों पर लगातार काम का दबाव बढ़ रहा है।
ब्रेकिंग न्यूज और रेटिंग की दौड़ का मीडिया कर्मियों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
रेटिंग और मापन व्यवस्थाओं की भी हो समीक्षा।
वॉइस ऑफ मीडिया ने कहा कि केवल टीआरपी व्यवस्था को बंद करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि टीएएम सहित मीडिया संस्थानों के प्रदर्शन की तुलना करने वाली विभिन्न रेटिंग एवं मापन व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जानी चाहिए।
संगठन का कहना है कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य रेटिंग और व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि जनहित, सच्ची एवं जिम्मेदार पत्रकारिता, सामाजिक सरोकार और लोकतंत्र को मजबूत करना होना चाहिए।
AI और कॉस्ट कटिंग से रोजगार पर संकट।
ज्ञापन में मीडिया क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई गई है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि वह तकनीकी विकास या AI के खिलाफ नहीं है, लेकिन तकनीक का इस्तेमाल मानव संसाधन का विकल्प बनाने के बजाय पत्रकारों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।
मीडिया संस्थानों में कॉस्ट कटिंग के नाम पर अनुभवी पत्रकारों एवं कर्मचारियों को नौकरी से हटाने के बजाय उन्हें री-स्किलिंग, अप-स्किलिंग और नई तकनीकों का प्रशिक्षण देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर व्यवस्था विकसित करने की मांग की गई है।
टेलीविजन उद्योग के संरक्षण की मांग।
वॉइस ऑफ मीडिया ने प्रधानमंत्री से टेलीविजन उद्योग की आर्थिक एवं रोजगार संबंधी स्थिरता के लिए विशेष नीति बनाने की मांग की है।
संगठन के अनुसार टेलीविजन उद्योग से पत्रकारों, संपादकों, रिपोर्टरों, डेस्क कर्मचारियों, कैमरामैन और तकनीकी कर्मचारियों समेत बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार जुड़े हैं।
ज्ञापन में केंद्र एवं राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयास से मीडिया क्षेत्र के लिए व्यापक राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की गई है।इसमें पत्रकारों का स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा, रोजगार संरक्षण, कौशल विकास, AI का जिम्मेदार उपयोग और टेलीविजन उद्योग की स्थिरता जैसे विषयों को शामिल करने की बात कही गई है।
“पत्रकार बचेगा तो पत्रकारिता बचेगी”।
संदीप काले ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में कहा कि देश की पत्रकारिता केवल टीआरपी के आंकड़ों की प्रतिस्पर्धा नहीं बननी चाहिए।
रेटिंग की दौड़ में पत्रकार का स्वास्थ्य, रोजगार, परिवार और पत्रकारिता की गुणवत्ता प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि “पत्रकार बचेगा तो पत्रकारिता बचेगी और पत्रकारिता बचेगी तो लोकतंत्र और मजबूत रहेगा।”
वॉइस ऑफ मीडिया इंटरनेशनल फोरम ने केंद्र सरकार से टीआरपी व्यवस्था को स्थायी रूप से बंद करने तथा पत्रकारों और मीडिया उद्योग के संरक्षण के लिए व्यापक राष्ट्रीय नीति पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेने की अपेक्षा जताई है।
इस मांग-पत्र पर वॉइस ऑफ मीडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल म्हस्के, महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष विजय चोरडिया सहित देश के विभिन्न राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के हस्ताक्षर भी किए गए हैं।
प्रगति मीडिया उत्तराखंड से संपादक की रिपोर्ट।

