उत्तराखंड।।जिला पंचायत सदस्यों की उपेक्षा के खिलाफ संगठन मुखर, 12 अक्टूबर को प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन का ऐलान।

देहरादून।। पंचायती राज व्यवस्था में व्याप्त विसंगतियों और जिला पंचायत सदस्यों की कथित उपेक्षा के खिलाफ प्रदेश जिला पंचायत सदस्य संगठन, उत्तराखंड ने मोर्चा खोल दिया है।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष भास्कर सम्मल एडवोकेट की अध्यक्षता में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और सरकार के समक्ष प्रमुख मांगें रखी गईं।
बैठक में संगठन ने आरोप लगाया कि जिला पंचायत सदस्यों को विकास कार्यों के संचालन और वित्तीय अधिकारों के मामले में अपेक्षित अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं।

सदस्यों ने कहा कि जिला पंचायतों को मजबूत किए बिना ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास की परिकल्पना पूरी नहीं हो सकती।
इन प्रमुख मांगों को लेकर संगठन ने उठाई आवाज
बैठक में सर्वसम्मति से सरकार से मांग की गई कि प्रदेश में जिला योजना समिति (DPC) का तत्काल गठन किया जाए।इसके साथ ही क्षेत्र पंचायत सदस्यों की तर्ज पर जिला पंचायत सदस्यों को भी विकास कार्यों के लिए समान वित्तीय अधिकार एवं पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जाए।

संगठन ने विकास कार्यों में ढाई लाख रुपये की बाध्यता एवं टेंडरिंग प्रक्रिया को समाप्त करने की मांग भी उठाई।

सदस्यों का कहना है कि इस बाध्यता के कारण छोटे विकास कार्यों के क्रियान्वयन में अनावश्यक दिक्कतें उत्पन्न हो रही हैं।
इसके अलावा 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत जिलों को आवंटित धनराशि के वितरण एवं उससे कराए गए कार्यों की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई।

प्रदेश में जिला पंचायतों द्वारा निर्मित सड़कों की गुणवत्ता और निर्माण कार्यों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग संगठन ने रखी है।
12 अक्टूबर को सभी जिला मुख्यालयों पर होगा धरना
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर एक सप्ताह के भीतर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की तो जिला पंचायत सदस्य आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे।
मांगों के समर्थन में संगठन ने 12 अक्टूबर को प्रदेश के सभी 13 जनपदों के जिला मुख्यालयों में मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।

इस दौरान जिला पंचायत सदस्य अपने-अपने जिलों में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी प्रेषित करेंगे।
संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि यह आंदोलन जिला पंचायत सदस्यों के अधिकारों के साथ-साथ पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए किया जा रहा है।

संगठन ने प्रदेश के सभी जिला पंचायत सदस्यों से 12 अक्टूबर के प्रदेशव्यापी आंदोलन में एकजुट होकर भाग लेने का आह्वान किया है।

प्रगति मीडिया उत्तराखंड से संपादक की रिपोर्ट।

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