दुर्गम पहाड़ में गांव के बीच रहकर मरीजों की सेवा, अब कटखेत में बड़े अस्पताल की पहल।
कटखेत।।उत्तराखंड के पहाड़ों की खूबसूरती के बीच आज भी कई दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ग्रामीणों को सामान्य उपचार के लिए भी कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।ऐसे में थौलधार ब्लॉक के दूरस्थ कटखेत क्षेत्र में डॉ.अनामिका शर्मा स्वास्थ्य सेवा की नई उम्मीद बनकर सामने आई हैं।
शहरों की सुविधाओं और आरामदायक जीवन को छोड़कर गांव में रहकर ग्रामीणों की सेवा करने का उनका प्रयास क्षेत्र में प्रेरणा का विषय बना हुआ है।
डॉ.अनामिका शर्मा केवल अपनी ड्यूटी तक सीमित नहीं हैं,बल्कि कटखेत में ही रहकर ग्रामीणों, बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समझने और उनके उपचार में सहयोग कर रही हैं।
सीमित संसाधनों के बावजूद उनका सेवा-भाव और ग्रामीणों के प्रति आत्मीय व्यवहार लोगों के बीच उनके प्रति विश्वास और सम्मान बढ़ा रहा है।
स्वतंत्रता दिवस पर ग्रामीणों के साथ मनाया राष्ट्रीय पर्व।
15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कटखेत क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. अनामिका शर्मा ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं क्षेत्रवासियों के साथ राष्ट्रीय पर्व मनाया।
इस दौरान देश के वीर सपूतों और स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया गया।साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार को लेकर विचार-विमर्श भी हुआ।
ग्रामीणों ने कहा कि दुर्गम क्षेत्र में रहकर चिकित्सकीय सेवाएं देना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
डॉ.अनामिका शर्मा का ग्रामीणों के बीच रहना और जरूरत के समय उपलब्ध होना क्षेत्र के लोगों के लिए भरोसे का विषय बना है।
डॉ.अनामिका शर्मा बोलीं—गांव में रहकर सेवा करना नौकरी नहीं, जिम्मेदारी।
डॉ.अनामिका शर्मा ने कहा कि पहाड़ के दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना उनके लिए केवल नौकरी का हिस्सा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि कटखेत जैसे दुर्गम क्षेत्र में रहते हुए उन्होंने ग्रामीणों की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को नजदीक से महसूस किया है।विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और जरूरतमंद लोगों को उपचार के लिए दूर जाना पड़ता है।
उन्होंने कहा “मेरा प्रयास है कि कटखेत और आसपास के ग्रामीणों को यथासंभव बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उनके घर के नजदीक मिल सके। गांव में रहकर लोगों की सेवा करने से मुझे यह समझने का अवसर मिलता है कि ग्रामीणों की वास्तविक जरूरतें क्या हैं।
डॉ.शर्मा ने कहा कि कटखेत में एक बड़े एवं बेहतर अस्पताल की स्थापना उनका सपना है। इस दिशा में उपलब्ध भूमि और आवश्यक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि शासन-प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों के सहयोग से यह सपना जल्द धरातल पर उतर सकेगा।
उन्होंने कहा कि यदि कटखेत में बेहतर स्वास्थ्य संस्थान स्थापित होता है तो इसका लाभ केवल एक गांव को नहीं, बल्कि आसपास के अनेक दूरस्थ गांवों को मिलेगा और लोगों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दूर शहरों की ओर जाने की मजबूरी कम होगी।
कटखेत में बड़े अस्पताल का सपना।
डॉ.अनामिका शर्मा का उद्देश्य केवल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। उनका प्रयास है कि कटखेत क्षेत्र में एक बड़ा एवं आधुनिक अस्पताल स्थापित हो,जिससे कटखेत सहित आसपास के कई गांवों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकें।
बताया गया कि अस्पताल के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में वर्षों पूर्व ग्रामीणों के पूर्वजों द्वारा भूमि दान किए जाने का इतिहास भी रहा है।ऐसे में अब आवश्यकता है कि उपलब्ध भूमि और संबंधित प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाते हुए अस्पताल निर्माण की दिशा में ठोस पहल की जाए।
पत्रकार गणेश जोशी बोले—ऐसे प्रयासों को मिलना चाहिए संस्थागत सहयोग।
पत्रकार गणेश जोशी ने कहा कि पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए ऐसे समर्पित चिकित्सकों के प्रयासों को प्रोत्साहन और संस्थागत सहयोग मिलना जरूरी है।
डॉ.अनामिका शर्मा का गांव में रहकर सेवा करना युवाओं और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि कटखेत में अस्पताल की स्थापना केवल एक गांव की आवश्यकता नहीं, बल्कि आसपास के अनेक गांवों के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इस दिशा में सकारात्मक पहल करनी चाहिए।
प्रधान धर्मानन्द जोशी—गांव में डॉक्टर का रहना बड़ी उपलब्धि।
प्रधान कटखेत धर्मानन्द जोशी ने कहा कि गांव में रहकर चिकित्सक द्वारा ग्रामीणों की सेवा करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
डॉ.अनामिका शर्मा जिस सेवा-भाव से ग्रामीणों के बीच काम कर रही हैं, उससे लोगों में उनके प्रति विश्वास और सम्मान बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि कटखेत में बड़े अस्पताल की स्थापना होने से आसपास के कई गांवों को लाभ मिलेगा और इसके लिए ग्रामीण स्तर से हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
प्रधान कौडू सब्बल सिंह रावत—अस्पताल क्षेत्र की बड़ी जरूरत।
प्रधान कौडू सब्बल सिंह रावत ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीणों को उपचार के लिए दूर जाना पड़ता है। ऐसे में कटखेत क्षेत्र में बड़े अस्पताल की स्थापना समय की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि यदि अस्पताल के लिए भूमि उपलब्ध है तो शासन-प्रशासन को संबंधित प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाते हुए इस जनहितकारी पहल को धरातल पर उतारना चाहिए।
प्रधान बगोन बेल सिंह चौहान—बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पलायन रोकने में भी सहायक।
प्रधान बगोन बेल सिंह चौहान ने कहा कि पहाड़ों से पलायन के प्रमुख कारणों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव भी शामिल है।यदि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों तो लोगों को इलाज के लिए शहरों की ओर जाने की मजबूरी कम होगी।
उन्होंने कहा कि डॉ.अनामिका शर्मा का प्रयास सराहनीय है और सभी जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों को मिलकर कटखेत में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्रयास करना चाहिए।
अब जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से उम्मीद
कटखेत में बड़े अस्पताल की स्थापना का सपना अब ग्रामीणों की आवश्यकता बन चुका है।
एक ओर क्षेत्र में समर्पित चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पताल के लिए भूमि उपलब्ध होने की बात सामने आ रही है।ऐसे में अब शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि इच्छाशक्ति और सकारात्मक पहल के साथ सरकारी तंत्र आगे बढ़े तो कटखेत में बड़े अस्पताल का सपना साकार हो सकता है।इससे थौलधार ब्लॉक के दूरस्थ गांवों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलने के साथ ही पलायन रोकने की दिशा में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
डॉ. अनामिका शर्मा का समर्पण इस बात की मिसाल है कि कठिन पहाड़ी परिस्थितियों के बीच भी यदि सेवा की भावना और मजबूत इच्छाशक्ति हो तो बदलाव की शुरुआत गांव से ही की जा सकती है।अब जरूरत है कि उनके इस प्रयास को शासन-प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समाज का अपेक्षित सहयोग मिले, ताकि कटखेत क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का सपना जल्द हकीकत में बदल सके।
प्रगति मीडिया उत्तराखंड टिहरी गढ़वाल से संपादक की रिपोर्ट।

